क्या हम सच में अपने जीवन से खुश हैं?
नज़र खुद पर रखिए, दूसरों के जीवन पर नहीं क्या हम सच में अपने जीवन से खुश हैं? या फिर हमारी खुशी इस बात पर निर्भर हो गई है कि दूसरे लोग हमसे आगे हैं या पीछे? आज के समय में विज्ञान और तकनीक ने हमारा जीवन बहुत आसान बना दिया है। मोबाइल फोन ने पूरी दुनिया को हमारी हथेली में ला दिया है। घर बैठे खरीदारी, बैंकिंग, पढ़ाई, मनोरंजन और बातचीत—सब कुछ कुछ ही मिनटों में हो जाता है। लेकिन इन सुविधाओं के बीच हमारे सामने एक नई समस्या भी खड़ी हो गई है— हम दूसरों के जीवन को बहुत ज्यादा देखने लगे हैं और अपने जीवन को बहुत कम। सोशल मीडिया खोलते ही किसी की नई कार दिखाई देती है, किसी का सुंदर घर, किसी की विदेश यात्रा, किसी की सफलता, किसी का खुशहाल परिवार। धीरे-धीरे हम अपने जीवन की तुलना दूसरों के जीवन से करने लगते हैं। और यहीं से मन की अशांति शुरू होती है। दूसरों से तुलना क्यों करती है हमें परेशान? हर इंसान का जीवन अलग है। उसकी परिस्थितियां, संघर्ष, परिवार, अवसर और जिम्मेदारियां भी अलग हैं। फिर भी हम किसी दूसरे व्यक्ति की जिंदगी का केवल एक छोटा-सा हिस्सा देखकर अपने पूरे जीवन को उससे तौलने लगते है...